उस ने बातें नहीं सुनी मेरी
और आवाज़ मर गई मेरी
मैं जिसे भूलता नहीं उस को
याद आती नहीं कभी मेरी
नहीं बन पाई ये मिसाल कभी
गई बेकार सादगी मेरी
शे'र कहता है जिस पे हर शाइर
उस हसीं से है दोस्ती मेरी
— Viru Panwar Viyogi
और आवाज़ मर गई मेरी
मैं जिसे भूलता नहीं उस को
याद आती नहीं कभी मेरी
नहीं बन पाई ये मिसाल कभी
गई बेकार सादगी मेरी
शे'र कहता है जिस पे हर शाइर
उस हसीं से है दोस्ती मेरी
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