जितने भी दिन सफ़र के लिए निकला घर से मैंइक दिन भी तेरे गाँव से आगे नहीं गयातू ने ही साथ चलना न चाहा कि मेरा तोरस्ता भी तेरे पाँव से आगे नहीं गया— Viru Panwar Viyogi