कोई करता नहीं है दुश्मनी भी
बहुत बेकार शय है सादगी भी
थी इक-तरफ़ा मोहब्बत मुझ को जिस से
नहीं कर पाया उस से दोस्ती भी
उदासी छोड़ देगी साथ जिस दिन
उसी दिन छोड़ दूँगा शाइरी भी
— Viru Panwar Viyogi
बहुत बेकार शय है सादगी भी
थी इक-तरफ़ा मोहब्बत मुझ को जिस से
नहीं कर पाया उस से दोस्ती भी
उदासी छोड़ देगी साथ जिस दिन
उसी दिन छोड़ दूँगा शाइरी भी
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