Meaning of

शय

shay • شے

वस्तु; चीज़; सार

thing; object; essence

چیز; شے; جوہر

Arabic

जिस शय पर वो उँगली रख दे उस को वो दिलवानी है
उस की ख़ुशियाँ सब से अव्वल सस्ता महँगा एक तरफ़

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किताब फ़िल्म सफ़र इश्क़ शा'इरी औरत
कहाँ कहाँ न गया ख़ुद को ढूँढ़ता हुआ मैं

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मैं पैहम हार कर ये सोचता हूँ
वो क्या शय है जो हारी जा रही है

76

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तेरे वादे से प्यार है लेकिन
अपनी उम्मीद से नफ़रत है

पहली ग़लती तो इश्क़ करना थी
शा'इरी दूसरी हिमाक़त है

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किसी बहाने से उस की नाराज़गी ख़त्म तो करनी थी
उस के पसंदीदा शाइ'र के शे'र उसे भिजवाए हैं

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ख़ुदा की शा'इरी होती है औरत
जिसे पैरों तले रौंदा गया है

तुम्हें दिल के चले जाने पे क्या ग़म
तुम्हारा कौन सा अपना गया है

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अच्छे शे'र सुनाने वाले लड़के सुन
अच्छे शाइ'र तन्हा ही रह जाते हैं

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तेरे बग़ैर भी जी कर दिखा दिया मैं ने
दुआएँ दे तुझे शाइ'र बना दिया मैं ने

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मैं सुख़न में हूँ उस जगह कि जहाँ
साँस लेना भी शा'इरी है मुझे

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पहले थोड़ी मुश्किल होगी
आगे लेकिन मंज़िल होगी

सब बाराती शाइ'र होंगे
मेरी शादी महफ़िल होगी

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जिस शय पर वो उँगली रख दे उस को वो दिलवानी है
उस की ख़ुशियाँ सब से अव्वल सस्ता महँगा एक तरफ़

57

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किताब फ़िल्म सफ़र इश्क़ शा'इरी औरत
कहाँ कहाँ न गया ख़ुद को ढूँढ़ता हुआ मैं

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'शय' का मूल अर्थ किसी वस्तु या चीज़ से है, चाहे वह मूर्त हो या अमूर्त। कविता में, यह अक्सर अपने शाब्दिक अर्थ से आगे बढ़कर किसी चीज़ के सार या मूल को दर्शाता है, जो रहस्य या गहराई का आभास कराता है।

कवि अक्सर 'शय' का उपयोग भावनाओं या अमूर्त अवधारणाओं के सार की खोज के लिए करते हैं। यह आत्मा या व्यक्ति के अस्तित्व के मूल के लिए एक रूपक हो सकता है।

कविता में, 'शय' अदृश्य और आवश्यक के चिंतन को आमंत्रित करता है।