किसी और पे नहीं मरूँगा मैंतेरा हूँ और तेरा रहूँगा मैंये उदासी की आख़िरी हद हैशे'र भी अब नहीं कहूँगा मैंचाहे जैसे भी पेश आए वक़्तअपनी रफ़्तार से चलूँगा मैंख़ैर सोचा तो था कि अपने शे'रउस की आवाज़ में सुनूँगा मैंज़ख़्म तक अपने भर नहीं पायाकिसी की माँग क्या भरूँगा मैं— Viru Panwar Viyogi