बात कुछ ऐसी है बात कुछ भी नहींबिन तेरे मेरी औक़ात कुछ भी नहींमैं अगर रोने पे आ गया तो मेरेअश्कों के आगे बरसात कुछ भी नहींजब भी मिलती है नज़रें चुरा लेती हैउस की मेरी मुलाक़ात कुछ भी नहीं— Viru Panwar Viyogi