"पापा"
मेरी ख़्वाहिश मेरे पापा मेरा जीवन मेरे पापा
अगर आया हूँ दुनिया में वो ज़रिया हैं मेरे पापा
जो मेरी बात करते हैं ज़माने से भी लड़ जाए
मुझे दर्पण दिखाते हैं ग़लत क्या है सही क्या है
मुझे ग़ुस्सा दिखाते हैं मुझे पुचकारते भी हैं
मगर दिल के वो सच्चे हैं वो जग में सब से अच्छे हैं
मेरे अरमान के ख़ातिर वो आधी पेट खाते हैं
वो ख़ुद का ग़म छुपाते हैं मुझे हँस के दिखाते हैं
उन्हें उम्मीद है मुझ से करूँगा नाम मैं रौशन
बनूँगा शान मैं उन का उन्हीं के राह पे चल कर
कभी जो टूट जाता हूँ सफ़र में छूट जाता हूँ
वही इक हाथ देते हैं मुझे गिरने नहीं देते
वो कहते हैं मेरे बेटे करो मेहनत रखो हिम्मत
करो कोशिश सदा हरदम अभी उम्मीद मत हारो
ज़रा सी आँधियाँ हैं ये तुम्हारा क्या बिगाड़ेगी
यक़ीनन चंद लम्हों में तुम्हें मंज़िल बुलाएगी
वही जो दूर है तुम से वही फिर पास आएँगे
जो रिश्ता तोड़ बैठे हैं वही अपना बुलाएँगे
समय का खेल है सब कुछ समय ही सब बताएगा
क़दम रोको नहीं इक दिन यही मंज़िल दिलाएगा
भला कैसे बता 'रंजन' ग़लत का रास्ता चुनता
पिता के आँख में आँसू भला क्या देख सकता है















