बहर-ए-मीर में लिखता जाऊँ तुम बोलो तो

बोलो तो फिर ग़जल सुनाऊँ तुम बोलो तो

जिस चेहरे के काइल हो तुम फिल्टर है वो
असली चेहरा तुम्हें दिखाऊँ तुम बोलो तो

मुझ को तुम से मिलना है रिश्वत लोगी क्या
गुलदस्ता तैयार कराऊँ तुम बोलो तो

तुम ने बोला सखियों के संग में आओगी
मैं भी अपने यार बुलाऊँ तुम बोलो तो

रंजन हम ने इक थाली में खाए हैं पर
फिर भी अपनी जात बताऊँ तुम बोलो तो

— ABHISHEK RANJAN

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