याद

मुझ को तेरी यादों ने बर्बाद किया
हर पल तेरे पास में ले कर जाती हैं

यादों को बोलो कि मुझ तक मत आऍं
आती हैं तो फिर ये बड़ा रुलाती हैं

आज भी उन गलियों से कभी गुज़रता हूँ
ऐसा लगता है मानो हाॅं साथ में हो

हाथ पकड़ के मेरा मुझ से कहती हों
देखो मुझ को वो कपड़े दिलवाओ ना
रंजन मुझ को उलझन में तुम लगते हो
बोलो मुझ को राज़ की बात बताओ ना

अच्छा बाबा सॉरी मेरी ग़लती है
अपनी ग़ज़ल से कोई शे'र सुनाओ भी

देखो मुझ को तुम्हारी उदासी खाती है
मुझ को देखो और अधिक तड़पाओ मत

हाथ पकड़ के मुझ को किसी ने खींचा था
तब जाना की यादों का वो सपना था

जो था मेरा वो क्या मेरा अपना था
वही जगह थी जहाँ पे अंतिम बार मिले

उन वादों को देखो अब तक निभा रहा
तन्हा अपना जीवन देखो बिता रहा मैं

यादों को अपने जीवन में डाला है
उन यादों को देखो कैसे पाला है

ऐसा लगता है मानो हाँ साथ में हो
जो बोलूँ जो सोचूँ हर इक बात में हो

रंजन तुम को काम मेरा एक करना है
मुझ को उन की यादों से अब दूर करो

— ABHISHEK RANJAN

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