मजनू बनकर शे'र कहोगे पागल हो क्या
बना के ऐसा हाल रहोगे पागल हो क्या
दिल से रुख़्सत होना है जाने भी दो ना
कब तक ख़ुद पर जुर्म सहोगे पागल हो क्या
आता जाता सब तुम को अच्छा लगता है
सब को अपना यार कहोगे पागल हो क्या
मौन रहोगे कोई कुछ भी कह सकता है
कब तक ग़ाज़ी मौन रहोगे पागल हो क्या
अच्छा ख़ासा लड़का था वो शाइ'र है अब
अब क्या उस की बात कहोगे पागल हो क्या
— ABHISHEK RANJAN















