तीरगी में मत बैठो रौशनी में आ जाओचाँद का ये अरमाँ है चाँदनी में आ जाओबेक़रार है ये दिल आप के लिए कब सेछोड़ कर झिझक मेरी ज़िंदगी में आ जाओ— Zeeshan kaavish