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फ़र्ज़ करो इक रात जहाँ पर सिर्फ़ हवा या पानी हो
फ़र्ज़ करो उस रात वहाँ पर हम तुम और जवानी हो
फ़र्ज़ करो उस रात वहाँ पर हम तुम और जवानी हो
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गुलमोहरस लाल तुम्हारे
कितने प्यारे गाल तुम्हारे
कितने प्यारे गाल तुम्हारे
जिधर करो रुख़ मौसम बिगड़े
इतने काले बाल तुम्हारे
दुनिया वाले कुछ भी बोलें
हम तो हैं फ़िलहाल तुम्हारे
बिना हमारे बीत गए हैं
अब तक सालों साल तुम्हारे
कभी कहोगे अगर हमें तुम
हम होंगे तत्काल तुम्हारे
हम ने चाल बदल कर देखी
बिछे हुए हैं जाल तुम्हारे
इस दुनिया से उस दुनिया तक
मिले न हम को हाल तुम्हारे
यार कि तकिया अबतक भीगी
सूख चुके रुमाल तुम्हारे
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बोल सको तो रावलपिंडी तक जाती है
ये देखेंगे कब तक दिल्ली तक जाती है
ये देखेंगे कब तक दिल्ली तक जाती है
करते रहिए ये तो है मालूम सभी को
मेहनत की आवाज़ बुलंदी तक जाती है
ओलम्पिक में कैसे जीतें सोना चाँदी
जब लड़कों की सोच ही लड़की तक जाती है
अब मानव को कभी न दिखती अपनी ग़लती
सबकी नज़र पराई ग़लती तक जाती है
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समुंदर भी मुझे हासिल मगर किस काम का मेरे
मैं उस दरिया पे मरती हूँ जिसे मैं पा नहीं सकती
मैं उस दरिया पे मरती हूँ जिसे मैं पा नहीं सकती
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