गुलमोहरस लाल तुम्हारे
कितने प्यारे गाल तुम्हारे
जिधर करो रुख़ मौसम बिगड़े
इतने काले बाल तुम्हारे
दुनिया वाले कुछ भी बोलें
हम तो हैं फ़िलहाल तुम्हारे
बिना हमारे बीत गए हैं
अब तक सालों साल तुम्हारे
कभी कहोगे अगर हमें तुम
हम होंगे तत्काल तुम्हारे
हम ने चाल बदल कर देखी
बिछे हुए हैं जाल तुम्हारे
इस दुनिया से उस दुनिया तक
मिले न हम को हाल तुम्हारे
यार कि तकिया अबतक भीगी
सूख चुके रुमाल तुम्हारे
— Suryapratap swtantra















