Aashish kargeti 'Kash'

Aashish kargeti 'Kash'

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Aashish kargeti 'Kash' shayari collection includes sher, ghazal and nazm available in Hindi and English. Dive in Aashish kargeti 'Kash''s shayari and don't forget to save your favorite ones.

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Sher

मैं अगर बता दूँ तो रो पड़ोगे तुम 'आशीष' एक रात का मुझ को हो गया था इतना दुख — Aashish kargeti 'Kash'
ख़ुश रहा करते थे तुम हमारे बग़ैर ज़िंदगी काट ली लो तुम्हारे बग़ैर — Aashish kargeti 'Kash'
वो मुझ से दूर जाने को मुसलसल दर बदलता है कभी घर का पता अपना कभी नंबर बदलता है — Aashish kargeti 'Kash'
जिस बेल से मिलने पे पौधा सूखता मेरी जड़ें उस बेल से जा कर मिलीं — Aashish kargeti 'Kash'
ख़्वाब अच्छा नहीं तुम्हारा ये इश्क़ पहला नहीं हमारा ये — Aashish kargeti 'Kash'
शमा' डगमगाने लगी है तेरी याद आने लगी है — Aashish kargeti 'Kash'
खाना कपड़े गाड़ी ज़ेवर लूँगा मैं अब के अरसे इतना कुछ कर लूँगा मैं — Aashish kargeti 'Kash'
उस ने मेरे घर के तब खर्चे संँभाले मैं ने जब दफ़्तर के सब पर्चे संँभाले — Aashish kargeti 'Kash'
इश्क़ ताला अगर वफ़ा चाबी खोल ताला सनम लगा चाबी — Aashish kargeti 'Kash'
ख़ास, जिगरी, मान ले मतलूब से हिज्र 'कश' तुझे मंज़ूर है? महबूब से हिज्र — Aashish kargeti 'Kash'
क्यूँ परेशाँ है मुश्किलों से तू प्रेत भी देव को दिखा करते — Aashish kargeti 'Kash'
मेरे मतले से लहजे का पता चल सकता है मेरी आँख से निकला पानी भी जल सकता है — Aashish kargeti 'Kash'
मुझ को तो लगता है तबीअत ठीक नहीं ख़ैर बताओं हाल तुम्हारा कैसा है — Aashish kargeti 'Kash'
वफ़ा करते नहीं पर प्यार का इज़हार करते दिखावा इश्क़ का ता-उम्र कैसे यार करते — Aashish kargeti 'Kash'
मैं ने लिखी है ख़ुद ख़ुदा पर ये कहानी तो क़िरदार में कोई कमी हो ही नहीं सकती — Aashish kargeti 'Kash'
मेरे क्यूँ कदम फिर तेरी ओर जाए तुझे जब मेरी आरजू ही नहीं है — Aashish kargeti 'Kash'
तेज़ आंधी में जज्बे नहीं बच सकेंगे ये तना शाख पत्ते नहीं बच सकेंगे — Aashish kargeti 'Kash'
हुस्न के सर पे क्या इश्क़ में खेलना इश्क़ के सर पे तुम हुस्न जीते मेरा — Aashish kargeti 'Kash'
मेरी तस्वीर में से मैं ही हो जाऊँगा गुम मेरी तस्वीर में कोई तलाशे गर उसे — Aashish kargeti 'Kash'

Ghazal

उस के इश्क़ में जितनी बंदिश होती थी मेरे मन में फिर बस रंजिश होती थी उस के गाँव में हल्के बादल आते थे मेरे गांव में भारी बारिश होती थी मुझ को ये लगता था मेरी क़िस्मत है उस की सोची समझी साज़िश होती थी मिलने में वो आनाकानी करती थी जब जब मिलने की गुंजाइश होती थी आँखों से भर भर कर पानी गिरता था और उसे लगता था बारिश होती थी और कभी कुछ माँगा हो तो बतलाओ ख़ुशियाँ उस की मेरी ख़्वाहिश होती थी ख़्वाहिश इक ऐसी भी थी जिस से मेरे जीवन में ग़म की पैदाइश होती थी उस के जिस्म को कोई जब छू लेता था मेरे पूरे बदन में ख़ारिश होती थी — Aashish kargeti 'Kash'

Nazm

"मेरा ग़म" कभी भी कहाँ कुछ कहा उस ने मुझ को फकत एक दी बद-दुआ उस ने मुझ को कहा था कभी भी नहीं होंगे रुख़सत कहा फिर कभी अलविदा उस ने मुझ को फ़क़त एक दी बद-दुआ उस ने मुझ को नहीं होती कोई गुज़ारिश ये दिल में नहीं दिल में कोई गिला मेरे होता नहीं इन दिवारों से बाहर निकलता नहीं कोई दिल में सिवा तेरे होता नहीं होती धड़कन धड़कता न दिल ये नहीं तुम जो होते कहा उस ने मुझ को फकत एक दी बद-दुआ उस ने मुझ को .... कभी जो मिले तो बुलाना नहीं फिर दुबारा बुलाए तो जाना नहीं फिर समझना ख़ुदा ही मुहब्बत है यारों बनाया था अपना ख़ुदा उस ने मुझ को कहा फिर कभी अलविदा उस ने मुझ को फकत एक दी बद-दुआ उस ने मुझ को — Aashish kargeti 'Kash'