जाने का वक़्त हो गया है अब 'बशर' चलो
    अस्बाब सारे छोड़ के कहते हैं अलविदा
    Dharmesh bashar
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    जिसमें 'बशर' न याद-ए-सनम हो न दर्द हो
    वो दिल भी दिल नहीं वो जिगर भी जिगर नहीं
    Dharmesh bashar
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    तुम्हारे ख़त पुराने क्या करूँगा
    दुबारा पढ़ के जाने क्या करूँगा

    मिरी धड़कन हुई मज़दूर उसकी
    ये दिल के कारख़ाने क्या करूँगा
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    Dharmesh bashar
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    चलो कुछ ऐ 'बशर' ताज़ा सुनाओ
    मिरी मुझको सुना कर क्या करोगे
    Dharmesh bashar
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    आज कुछ घायल परिंदों की दुआओं में सुना है
    आसमाँ चाहे न हो पर पाँव के नीचे ज़मीं हो
    Dharmesh bashar
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    कितने सैयारे ख़ला में घूमते
    इन पतंगों को उड़ाता कौन है
    Dharmesh bashar
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    एक इतनी सी यार थी हसरत
    एक दिन हम भी अपने घर जाते
    Dharmesh bashar
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    आइने और आबगीने तोड़ डालो
    दिल नज़र के सब नगीने तोड़ डालो

    ख़ुश-गुमानी और मुरव्वत जो रखे वो
    दिल तो दिल है, तुम वो सीने तोड़ डालो

    सब फ़रेब-ओ-जौर वाले खेल खेलो
    रब्त वाले सब क़रीने तोड़ डालो

    तुम को क्या उस पार किसका है ठिकाना
    सैर-ए-साहिल तुम सफ़ीने तोड़ डालो

    इस्मत-ओ-इफ़्फ़त वक़ार-ओ-आबरू फिर
    चाहे जिस का हाथ छीने तोड़ डालो
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    Dharmesh bashar
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    नन्हा सा दिया घर में जो ख़ामोश पड़ा है
    सोने दो उसे रात अँधेरों से लड़ा है

    वो शख़्स जो शोहरत की बुलंदी पे खड़ा है
    सुनते हैं कि उस शख़्स का व्यापार बड़ा है

    इस दौर-ए-तनाफ़ुर में जो मसरूर बड़ा है
    जज़्बात की कुचली हुई लाशों पे खड़ा है

    तेशे ही फ़क़त बर-सर-ए-पैकार नहीं थे
    इक शीशे का पैकर भी तो पत्थर से लड़ा है

    फिर देखना ग़र्क़ाब न हो सोहनी कोई
    रक्खा हुआ साहिल पे वहीं कच्चा घड़ा है

    अहबाब से बारूद मिली प्यार के बदले
    दुश्मन किसी दुश्मन पे अगर टूट पड़ा है

    मुझको तो नज़र आती नहीं कोई बड़ी बात
    किस बात पे कहते हो मेरा शहर बड़ा है
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    Dharmesh bashar
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    जाएज़ा लेता है फ़ज़ाओं का
    हर परिंदा उड़ान से पहले
    Dharmesh bashar
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