Meaning of

सकूँ

sakoon • سکوں

शांति; सुकून

peace; tranquility

سکون; اطمینان

Arabic

मैं सोचता हूँ जब कभी आओगी सामने किस मुँह से कह सकूँगा मोहब्बत नहीं रही — Shoonya
जाँ दे के भी चाहूँ तो उसे पा न सकूँ मैं वो चाँद का टुकड़ा जो दरीचे में जड़ा है — Asghar Gorakhpuri
रख सकूँ मैं ख़याल माँ का मुझे इस लिए कामयाब होना है — ABhishek Parashar
बुत के आगे न रो सकूँगी मैं तेरी होकर न हो सकूँगी मैं — Arohi Tripathi
उस की हसरत है जिसे दिल से मिटा भी न सकूँ ढूँडने उस को चला हूँ जिसे पा भी न सकूँ — Ameer Minai
मैं ने हर बार ही चाहा कि तुझे चाह सकूँ तू ने मजबूर किया है मुझे जाने के लिए — Rakesh Mahadiuree
रख सकूँ मैं ख़याल तेरा मुझे इस लिए कामयाब होना है — ABhishek Parashar

'सकूँ' एक कोमल शब्द है जो शांति और सुकून की भावना को वहन करता है। कविता में, यह अक्सर उस आंतरिक शांति का प्रतिनिधित्व करता है जिसे कोई व्यक्ति अराजकता के बीच खोजता है। यह शब्द विश्राम की स्थिति का सुझाव देता है, जीवन के कोलाहल में एक विराम, जहां आत्मा अपनी शांति पाती है।

एक शांत रात की स्थिरता को जागृत करने के लिए उपयोग किया जाता है। प्रेमी की बाहों में पाए जाने वाले सुकून का प्रतिनिधित्व करता है। तूफान के बाद की खामोशी को व्यक्त करता है।

'सकूँ' दिल की कोमल लोरी है। यह वह शांत कोना है जहां सपने विश्राम करते हैं।