Meaning of

सकूँ

sakoon • سکوں

शांति; सुकून

peace; tranquility

سکون; اطمینان

Arabic

किसी की बाँह भी ख़ाली नहीं की रो सकूँ जिस
में
तुम्हारे जिस्म से ये मन बहुत उक्ता गया सा है

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मैं सोचता हूँ जब कभी आओगी सामने
किस मुँह से कह सकूँगा मोहब्बत नहीं रही

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उस की हसरत है जिसे दिल से मिटा भी न सकूँ
ढूँडने उस को चला हूँ जिसे पा भी न सकूँ

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उदास चेहरे पे इक नई उदासी छा गई
पहरस पहले बाद-ए-सबा हमें जगा गई

अजब नहीं जो लांछनों से मैं बरी न हो सकूँ
सफ़ाई देने के समय ही मुझ को नींद आ गई

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मैं ने हर बार ही चाहा कि तुझे चाह सकूँ
तू ने मजबूर किया है मुझे जाने के लिए

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जाँ दे के भी चाहूँ तो उसे पा न सकूँ मैं
वो चाँद का टुकड़ा जो दरीचे में जड़ा है

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रख सकूँ मैं ख़याल तेरा मुझे
इस लिए कामयाब होना है

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रख सकूँ मैं ख़याल माँ का मुझे
इस लिए कामयाब होना है

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तुम्हारी ज़िंदगी में तुम हमेशा
मुझे हर आदमी में सुन सकोगी

सुनोगी जब कभी भी शे'र मेरे
तो ख़ुद को शा'इरी में सुन सकोगी

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बुत के आगे न रो सकूँगी मैं
तेरी होकर न हो सकूँगी मैं

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किसी की बाँह भी ख़ाली नहीं की रो सकूँ जिस
में
तुम्हारे जिस्म से ये मन बहुत उक्ता गया सा है

5

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मैं सोचता हूँ जब कभी आओगी सामने
किस मुँह से कह सकूँगा मोहब्बत नहीं रही

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'सकूँ' एक कोमल शब्द है जो शांति और सुकून की भावना को वहन करता है। कविता में, यह अक्सर उस आंतरिक शांति का प्रतिनिधित्व करता है जिसे कोई व्यक्ति अराजकता के बीच खोजता है। यह शब्द विश्राम की स्थिति का सुझाव देता है, जीवन के कोलाहल में एक विराम, जहां आत्मा अपनी शांति पाती है।

एक शांत रात की स्थिरता को जागृत करने के लिए उपयोग किया जाता है। प्रेमी की बाहों में पाए जाने वाले सुकून का प्रतिनिधित्व करता है। तूफान के बाद की खामोशी को व्यक्त करता है।

'सकूँ' दिल की कोमल लोरी है। यह वह शांत कोना है जहां सपने विश्राम करते हैं।