एक ख़्वाब
लाल बिंदी माथा चू
में ख़ुशबू महकाए तन
देख उन्हें ख़्वाबों में खिलता हो जैसे मन
चाँद सी प्यारी सूरत झीलों सी गहरी आँखें
शहद से हैं लब उन के मीठी सी उन की बातें
ख़्वाब में मिल जाते हैं हम उन से कुछ ऐसे कि
गुज़रता हैं न दिन न ही गुज़रा करती रातें
पंख फैला उड़ती वो कौन तितली न जाने
फूल हम भी बन जाते जब आती वो महकाने
दूर से देखा करती हैं वो ज़ुल्फ़ों को लहराए
क़त्ल करती हैं मानो कोई उन को समझाए
है परी कोई या है वो कोई जादूगरनी
दिल हमारा मंत्रित कर के वश में करती जाए
ख़्वाब में मिल जाते हैं हम उन से कुछ ऐसे कि
गुज़रता है न दिन न ही गुज़रा करती रातें















