
शाम जो उन को साथ बैठाया
आसमाँ ने भी नूर बरसाया
साज़िशे सारे तारों ने की जब
अपनी ज़ुल्फ़ों को उस ने लहराया
चाँद भी जलने सा लगा फिर जब
उस ने खुलके ज़रा सा मुस्काया
— Piyush Shrivastava
Other sher from the same pen
Shers of husn.
Voices in the same orbit
Poetry by feeling