जैसे गहरी सी नदिया की मँझधार मेंऐसे उलझा पड़ा हूँ मैं संसार मेंजो भी चाहे वो उतनी ही चाभी भरेजैसे कोई खिलौना हूँ बाज़ार में— Piyush Shrivastava