रिवीज़न सौ दफ़ा कर के था मैं आया क़िताबों के मैं पर्चे भी बना लायामैं बैठा इश्क़ के इस इम्तिहाँ में जबतो पेपर ही सिलेबस से परे आया— Pritam sihag