तेरे बग़ैर मेरा अफ़्साना चाहता हूँया'नी कि ज़िंदगी में वीराना चाहता हूँयूँ ही नहीं लगाया सिगरेट को लबों सेमैं उस की सारी यादें सुलगाना चाहता हूँ— Pritam sihag