तंग हालात में ख़ुश था जो गुज़ारा कर के
इस बरस छोड़ गया मुझ को पराया कर के
मेरी तकलीफ़ में कुछ और इज़ाफ़ा कर के
जाने क्या मिल गया होगा उसे ऐसा कर के
और बढ़ता है मरज़ चीख़ने चिल्लाने से
मैं ने देखा है कई बार तमाशा कर के
कोई दिल तक नहीं पहुँचा है अभी तक मेरे
और जीना है अभी दिल मुझे छोटा कर के
हम भी अच्छे हैं ज़माना भी है अच्छा लेकिन
इक दफ़ा देखिए इस बात को उल्टा कर के
कितने ज़ालिम हैं तेरे शहर के चारागर देख
फिर से मरने को मुझे छोड़ा है अच्छा कर के
नर्म आवाज़ में फिर भी नहीं बोला वो शख़्स
जब कि ख़ामोश खड़ा सर को मैं नीचा कर के
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