@rudranshtrigunayat
Rudransh Trigunayat shayari collection includes sher, ghazal and nazm available in Hindi and English. Dive in Rudransh Trigunayat's shayari and don't forget to save your favorite ones.
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नहीं जी लगता जाने क्या हुआ है
धड़कता दिल है मुँह उतरा हुआ है
बहन ने माँ को कल ये भी बताया
किसी चक्कर में ये बहका हुआ है
मैं हूँ नाकाम लड़का और फिर नाकाम भी इतना
न मैंने नौकरी पाई न वो सहमत हुई मुझसे
अगर वो रूठ जाए तो तरीका ये नया करती
कभी कंगन खनकते थे कभी पायल बजा करती
बड़ी मुश्किल से ख़्वाबों को हक़ीक़त में बदलते थे
गली से तब गुज़रता था वो चौखट पर हुआ करती
झूठ बोले वो मिरा यार नहीं हो सकता
चाहकर भी तो नया प्यार नहीं हो सकता
मैं अकेला हूँ बहुत मुझ पे है ज़िम्मेदारी
काम हर इक तिरे अनुसार नहीं हो सकता
मुझे ये डर सताता है, कहीं तुम खो न दो मुझको
मैं जो उठ कर चला जाता हूँ तो वापस नहीं आता
मुझे झूठा भरोसा फिर दिलाया जा रहा है
मिरे दुख का तमाशा क्यों बनाया जा रहा है
तिरे होते हुए मुझको उदासी खा रही है
तिरे होते हुए मुझको सताया जा रहा है
ज़रूरत ही नचाती है भरी महफ़िल में उसको
वो जो मासूम कुछ दिन और पढ़ना चाहती है
चूम लें होंठ तुम्हारे कितना मुश्किल है
चाँद को पास बुलाने जितना मुश्किल है
दस्त सींचा हाथ से इक पेड़ पर फल है नहीं
अब तुम्हें हम क्या बताएँ क्या परेशानी हुई
यार उसके क़ीमती तोहफ़े तो लाए थे बहुत
मैं बरेली का था मैंने ला के झुमका दे दिया
मुझे तुम पर कोई ग़ुस्सा नहीं है
तुम्हें वो छू गया अच्छा नहीं है
मैं माँ से था मिलाने को तुम्हें, पर
तुम्हारा इश्क़ भी सच्चा नहीं है
बेवजह बंदिशें लगाई नहीं जाती
एक लड़की मुझे भुलाई नहीं जाती
चाहता हूँ उसी से शादी मेरी हो, सो
इश्क़ में कुंडली मिलाई नहीं जाती
जवानी में चमक है वो बुढ़ापे का सहारा है
ख़ुदी को देखता जिसमें वही बेटा हमारा है
गज़ब हिम्मत सुबह माँ से विदा बेटी हुई होगी
बिछुड़ना माँ अभी उससे महज सपना समझती है
सितम गर ये मुझे झूठा कहा तुमने कयामत है
कसम खाकर कहूँ तो माँ अभी सच्चा समझती है
ये दुनिया है कहेगी कुछ उसे कच्चा समझती है
कि सौतेली अगर है भी प' माँ बच्चा समझती है
काँटों की महफ़िल में, हम फूल कहां जाएँगे
तेरी उस चाहत को, हम भूल कहाँ पाएँगे