Rudransh Trigunayat

Rudransh Trigunayat

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Rudransh Trigunayat shayari collection includes sher, ghazal and nazm available in Hindi and English. Dive in Rudransh Trigunayat's shayari and don't forget to save your favorite ones.

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  • Sher
  • Ghazal

बातें नहीं करनी मुझे यार फिर भी
उस शख़्स ने बातों में उलझा रखा है

Rudransh Trigunayat

मैं ख़ुश हूँ कम से कम वो साथ है मेरे
अमाँ सब कुछ उसे पाना नहीं होता

Rudransh Trigunayat

नहीं जी लगता जाने क्या हुआ है
धड़कता दिल है मुँह उतरा हुआ है

बहन ने माँ को कल ये भी बताया
किसी चक्कर में ये बहका हुआ है

Rudransh Trigunayat

मैं हूँ नाकाम लड़का और फिर नाकाम भी इतना
न मैंने नौकरी पाई न वो सहमत हुई मुझसे

Rudransh Trigunayat

अगर वो रूठ जाए तो तरीका ये नया करती
कभी कंगन खनकते थे कभी पायल बजा करती

बड़ी मुश्किल से ख़्वाबों को हक़ीक़त में बदलते थे
गली से तब गुज़रता था वो चौखट पर हुआ करती

Rudransh Trigunayat

झूठ बोले वो मिरा यार नहीं हो सकता
चाहकर भी तो नया प्यार नहीं हो सकता

मैं अकेला हूँ बहुत मुझ पे है ज़िम्मेदारी
काम हर इक तिरे अनुसार नहीं हो सकता

Rudransh Trigunayat

मुझे ये डर सताता है, कहीं तुम खो न दो मुझको
मैं जो उठ कर चला जाता हूँ तो वापस नहीं आता

Rudransh Trigunayat

मुझे झूठा भरोसा फिर दिलाया जा रहा है
मिरे दुख का तमाशा क्यों बनाया जा रहा है

तिरे होते हुए मुझको उदासी खा रही है
तिरे होते हुए मुझको सताया जा रहा है

Rudransh Trigunayat

ज़रूरत ही नचाती है भरी महफ़िल में उसको
वो जो मासूम कुछ दिन और पढ़ना चाहती है

Rudransh Trigunayat

चूम लें होंठ तुम्हारे कितना मुश्किल है
चाँद को पास बुलाने जितना मुश्किल है

Rudransh Trigunayat

दस्त सींचा हाथ से इक पेड़ पर फल है नहीं
अब तुम्हें हम क्या बताएँ क्या परेशानी हुई

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यार उसके क़ीमती तोहफ़े तो लाए थे बहुत
मैं बरेली का था मैंने ला के झुमका दे दिया

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नींद आती नहीं मुझे शब भर
देख लेते मुझे वो गर पल भर

Rudransh Trigunayat

मुझे तुम पर कोई ग़ुस्सा नहीं है
तुम्हें वो छू गया अच्छा नहीं है

मैं माँ से था मिलाने को तुम्हें, पर
तुम्हारा इश्क़ भी सच्चा नहीं है

Rudransh Trigunayat

बेवजह बंदिशें लगाई नहीं जाती
एक लड़की मुझे भुलाई नहीं जाती

चाहता हूँ उसी से शादी मेरी हो, सो
इश्क़ में कुंडली मिलाई नहीं जाती

Rudransh Trigunayat

जवानी में चमक है वो बुढ़ापे का सहारा है
ख़ुदी को देखता जिसमें वही बेटा हमारा है

Rudransh Trigunayat

गज़ब हिम्मत सुबह माँ से विदा बेटी हुई होगी
बिछुड़ना माँ अभी उससे महज सपना समझती है

सितम गर ये मुझे झूठा कहा तुमने कयामत है
कसम खाकर कहूँ तो माँ अभी सच्चा समझती है

Rudransh Trigunayat

ये दुनिया है कहेगी कुछ उसे कच्चा समझती है
कि सौतेली अगर है भी प' माँ बच्चा समझती है

Rudransh Trigunayat

यादें किसी भी डगर से जाती नहीं
भूले बहुत कुछ मगर ये जाती नहीं

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काँटों की महफ़िल में, हम फूल कहां जाएँगे
तेरी उस चाहत को, हम भूल कहाँ पाएँगे

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