BR SUDHAKAR

BR SUDHAKAR

@SudhakarSalim

BR SUDHAKAR shayari collection includes sher, ghazal and nazm available in Hindi and English. Dive in BR SUDHAKAR's shayari and don't forget to save your favorite ones.

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Sher

एक ही है रस्ता मेरा बस और इक ही मंज़िल है एक ही है मेरे फोन में नंबर जिस के आगे दिल है — BR SUDHAKAR
हर गुनह को इक सज़ा है उस का हक़ दोस्त बे-वफ़ा मरता नहीं, कितना ग़लत है — BR SUDHAKAR
सोच रही है वो, आएँ हैं किस के तोहफ़े पहले भूल गई है मैं दिल दे चुका हूँ उसे सब सेे पहले — BR SUDHAKAR
शा'इरी और नौकरी है दोनों ही मेरी ज़रूरत इक है दिल भरने को और इक पेट भरने के लिए है — BR SUDHAKAR
तेरे अलावा भी मेरे तो चाहने वाले बहुत हैं और मैं तो वैसे भी हूँ दरिया, और फिर प्यासे बहुत हैं — BR SUDHAKAR
सब सेे अमीर हो तुम दुनिया में अब से लड़की हाँ तुम ने एक शाइ'र का दिल चुरा लिया है — BR SUDHAKAR
आज ही भेजी गई थी अर्ज़ पर परियाँ आज तो है आप का भी 'बर्थडे' है ना? © Sudhakar' Salim ' — BR SUDHAKAR
ये जान ले ली ठीक है पर ये पता है दोस्त ये जान गिरवी थी तेरी ही ज़िन्दगी के लिए — BR SUDHAKAR
हम ने दिया उस को ढेरों प्यार मगर ये सच हम ने भी उसे बस ख़ाली हाथ मोहब्बत की — BR SUDHAKAR
तोहफ़े इतने आए कि दिल भी ख़ाली नहीं अब तो और मेरी अलमारी तक की साँसें फूल गई — BR SUDHAKAR
उस के बिन मर जाएँगे हम ने कहा था अब हो कोशिश क्यूँ? कि जब जीना ग़लत है — BR SUDHAKAR
ज़िंदगी के प्यारे और उस की ख़ुशी के सात दिन कुछ अलग ही लगते हैं ना ? फरवरी के सात दिन — BR SUDHAKAR
उस को है मालूम कहाँ पे बात पलटनी है अपनी उस को अंदाज़ा है रोटी कब किस ओर से सेकेंगे — BR SUDHAKAR
नाच रहे सब सेे ये कह के फूल वो इन के पाज़ेब बनाती है — BR SUDHAKAR
तेरा दिसंबर, मेरे सितंबर के ही बा'द आएगा पहले शहजादा आया था फिर शहजादी आई — BR SUDHAKAR
ऐसी वो इक बात मुझ सेे थी छुपाती वो भी ऐसी बात जो मैं जानता था — BR SUDHAKAR
इक प्यारा सा दिल है मेरे पास आप रहोगी तो ये घर ख़ाली है — BR SUDHAKAR
सभी से पूछती है देख कर मुझ को मेरा दिल खो गया है, है किसी के पास — BR SUDHAKAR
क्या ही है दोस्त तू मेरा क्या दोस्ती तेरी जब बर्थडे ही मेरा, न मैं तुझ को याद हूँ — BR SUDHAKAR

Ghazal

दुनिया जंगल लगती है डर लगता है बाबू एक तेरा दिल ही तो बस घर लगता है बाबू क्यूँ तू झगड़ा करता नहीं और लड़ता नहीं मुझ सेे इस इक बात से मुझ को अब डर लगता है बाबू तेरा रोज़ किसी से चक्कर चलने लगता है तेरा रोज़ किसी से जा सर लगता है बाबू हाथ उठा देगा तू ग़ुस्से में मुझ पे भी कभी ऐसा देख के तेरा तेवर लगता है बाबू तेरी अम्मी भी तो मेरी सास लगेगी ना मेरा भाई जब तेरा देवर लगता है बाबू मैं हट भी जाऊँ तो कोई चला आएगा यहाँ तू तो न जाने कितनो को बेहतर लगता है बाबू मैं हूँ अनारकली तेरी तू शे'र तो कह मुझ पे तू लगता है सलीम तू शाइ'र लगता है बाबू — BR SUDHAKAR
आज भी हाथ ख़ाली, लगा हाथ कुछ भी नहीं अब कटेगी नहीं वैसे तो रात कुछ भी नहीं एक दरिया हूँ मैं ख़्वाहिशों का मुझे भाप ले मेरी इस प्यास के आगे बरसात कुछ भी नहीं एक लड़की का है बर्थडे और मेरा हाल देख नौकरी जा चुकी, तोहफ़े को हाथ कुछ भी नहीं इश्क़ में लोग अपनी लुटा देते है जान, फिर तेरे अब तक के बिगड़े ये हालात कुछ भी नहीं लोग गर आप कर के भी बोलें तो ग़ुस्सा लगे आप गर तू- तू भी बोलो तो बात कुछ भी नहीं ख़ुद मैं ही जी रहा हूँ किसी और के देन पे पास मेरे है देने को ख़ैरात कुछ भी नहीं तू जो कह देता तो हम क्या न कर देते तेरे लिए हाथी, घोड़े ये बाजा, ये बारात कुछ भी नहीं — BR SUDHAKAR
जिस को सोच रहा हूँ मैं, मेरा है सब कुछ वो ही सताता है मुझ को, कहता है सब कुछ कोई सब कुछ हो के भी लगता कुछ नईं है कोई कुछ भी नहीं हो पर लगता है सब कुछ इस टूटे फूटे जंगल में हिरण सोने का शायद कोई छलावा है धोखा है सब कुछ वो अंबर की तरफ़ कर के यूँ इशारे बोली देख रहे हो इसे इक दिन अपना है सबकुच चाहे झगड़ों मारो सब कुछ ही है ठीक दिल मेरा ये मान गया है ख़ुदा है सब कुछ ऐसा क्या ही सब कुछ माँग रहा हूँ मैं ख़ुद से ऐसा है क्या जिस पे ख़ुद का खोना है सब कुछ मेरी आँखों में तू ने दुनिया देखी बस तेरी आँखों में मुझ को दिखता है सब कुछ ज़हर की शीशी रस्सी चाकू मैं सब ले आया इक दिन मोका मिले बस कर देना है सब कुछ पूछ रहा था मां मेरा क्या होगा, मां बोली ख़ुश रह इतना भी क्या सोच रहा है सब कुछ कोई असर नईं मुझ को सिगरेट कितनी भी पीऊं ऐसा ख़ुद को समझा दिया है दवा है सब कुछ — BR SUDHAKAR
ये पंछी जंगल से है उतना दूर जितना दिल्ली से होगा आंध्रा दूर हाथ रखूं दिल पे अपने तो छू लूँ कितना दूर है घर तेरा, कितना दूर ? पहली बार चढ़ा है फोन का भी बिल पहली बार लगा है, कोई हुआ दूर ठीक से रहना अच्छा खाना पीना सोच में मत रहना मैं तुम सेे हुआ दूर मुझ सेे दूर सफ़र है, और थोड़ा है कुछ ये ज़ियादा नहीं लगता थोड़ा दूर कब बैठेगा तू वापस दिल्ली को कब होगा मुझ सेे ग़म का साया दूर मैसेज करना मुझे ख़ाली होना जब ले के चलना था तुम को थोड़ा दूर पास बिठाना अपने हिफ़ाज़त करना पर जब वो जा कह दे, हो जाना दूर मुझ को प्यार नहीं कर सकता बस में फिर तेरा ग़ुस्सा और तेरा पैसा दूर उस का वापस आना फिर मुमकिन नईं जिस को पता दे के मेरा भेजा दूर — BR SUDHAKAR
धूप में जब बाहर देखोगे क्या होता है तब तो जानोगे ना कैसे क्या होता है मैं ही अच्छा लगता हूँ तुम को यूँ बोलो अच्छे लगते हैं तुम जैसे क्या होता है रिश्ते दिल से मिलाए जाते है ये सुना था फिर मैं सोचूँ हाथ मिला के क्या होता है लड़ना छोड़ो आपस में सब मिल के सोचो कोई कहाँ जाता है मर के क्या होता है नाम भी तो मेरा तुम ले सकती हो ना लड़की ये ओए लड़के सुन लड़के क्या होता है बाय कहा उस ने मेरा हाथ छुड़ाते हुए दोस्त मैं ने आज ही जाना मिल के क्या होता है तू ही कहती थी तेरे बिन भी जी लूंगी मुझ सेे बिधड़ के देखा तू ने क्या होता है इंग्लिश की टीचर हो गई है तूं रोज़ यही बस बोलो एल से क्या और यूँ से क्या होता है — BR SUDHAKAR
सहरा कभी हो जाए तर मतलब नहीं बनता हम जैसे दीवानों में डर मतलब नहीं बनता जो इश्क़ करते है वो आवारा ही रहते है बंजारों का हो अपना घर मतलब नहीं बनता वा'दा किया था एक लड़की को बहुत पहले अब संग तेरे हो सफ़र मतलब नहीं बनता मतलब नहीं बनता तेरा तू कुछ कहें मुझे गर तू साथ मेरे क्यूँ है गर मतलब नहीं बनता हम रोज़ पूछेंगे हमारा हाल वा'दा था ना फिर आज मैं ही लूँ ख़बर मतलब नहीं बनता सर पेड़ के नीचे छुपाओगे अगर अपना बन जाएगा अंबर पे घर मतलब नहीं बनता जिस में दिवाने हो तेरे और तू लुटेरी हो बस जाएगा वो भी नगर मतलब नहीं बनता — BR SUDHAKAR
पूछ रहे हो आख़िर है क्या जंगल में जो भी भटके उन का रस्ता जंगल में किस को इश्क़ के रस्ते में आसानी हुई तू भी भटकी मैं भी भटका जंगल में वो ही काम करेगा तेरे इलाज में बस इक वो जंगली फूल मिलेगा जंगल में सारे परिंदे इंग्लिश बोल रहे है अब इक लड़की ने ऐसा पढ़ाया जंगल में प्यार में इतना तेरा पागलपन ठीक नहीं रात गए मिलने को बुलाया जंगल में जंगल वाले ही साथ नहीं देते है यहाँ पेड़ यहाँ कटता जंगल का जंगल में घर पे बुला के क्या दे देना है तुम ने ठीक था अच्छा ख़ासा बैठा जंगल में रो-रो के मुझ सेे कहते है पेड़ सभी यार तू पहले क्यूँ नहीं आया जंगल में — BR SUDHAKAR
साथ दिया तेरे अपनो ने तू ने दीए जलाए हम सेे पूछ तू हम ने कैसे दीए जलाए तू ये दुआ करता है हम अँधेरे देखें बस और हम ने तेरे घर में, थे दीए जलाए बंद पड़े कमरे में तू ने उजाले हैं फेंके लड़की कहने को बस तू ने दीए जलाए रूठ नहीं जाए हम सेे वो कभी बस इस डर में कितनी दुआ की हम ने कितने दीए जलाए हाथ जला है कितना ये तो तू ने पूछा नहीं तू बस पूछ रहा है कितने दीए जलाए दुनिया रौशन करने के ज़िद में है वो सारे उस के नाम से हम ने जितने दीए जलाए उस में मुझ में इतना ही है फ़र्क समझ लो बस उस ने जलाया दिल और मैं ने दीए जलाए इक लड़की ले के आई है उजाले घर में 'सलीम' उस ने क़दम रखते ही पहले दीए जलाए — BR SUDHAKAR
मेरे तुम साथ बस इतनी वफ़ा करना नहीं कुछ बस मेरा तुम हक़ अदा करना हमारे रास्ते बिल्कुल अलग है अब मैं क्या करता हूँ इस सेे तुम को क्या करना बना दे ज़ख़्म जो वो भर नहीं सकते भले फिर तुम दवा करना दुआ करना है उस का जादू ऐसा देखे जो बोले इसे तुम यार इक और मर्तबा करना यहाँ आता नहीं कोई सिवा तेरे मुझे तू मेरे ख़्वाबों में मिला करना मुझे तुम ख़ुद में भी जाॅं देख सकती हो ख़ुदी से कभी तुम बातें किया करना जो भी थे क़ैद मेरे साथ बस उन का मुझे चेहरा दिखा दो फिर रिहा करना जिन्हें चाहे तू उन को देख पहले,पर इन्हीं के बा'द मेरा भी भला करना — BR SUDHAKAR
अपने बच्चो की तुझ को मैं जन्नत सखी मैं बना लूँ तुझे अपनी उलफ़त सखी मेरी चाहत है बेटी हो इक मुझ को भी और हो तेरी तरह जिस की सूरत सखी इस लिए भी वो मुझ सेे है ग़ुस्सा बहुत दोस्तों में, मेरी इक है औरत सखी तू ही कहती थी अपनी मोहब्बत है सच अब तू ही कर रही है बग़ावत सखी बे-वफ़ाई की जिस ने करेगा वो फिर छूट सकती नहीं ये वो आदत सखी इक परी लड़की का मैं ने दिल तोड़ा है मैं नहीं कर सका हूँ मोहब्बत सखी पेड़ जो सीधे होते, वो काटे हैं लोग छोड़ दूँगा मैं भी अब शराफ़त सखी है नहीं मिलता जल्दी किसी से 'सलीम' चाहे तुझ को, ये उस की इनायत सखी — BR SUDHAKAR

Nazm

"दुख" मुझे जो लगा, वो नहीं हूँ मैं अब उस जगह तो नहीं हूँ तू इक कॉल मैसेज नहीं कर रही है कि ऐसी वो क्या ही शिकायत है? जो मुझ सेे तू कर नहीं पा रही है बताती नहीं है सताती रही है मुझे तू बता क्यूँ ख़फ़ा है मुझे तू बता क्या हुआ है तू कुछ बोल ये ख़ामोशी काटती है मुझे जान ले बस ये आँखें किसे रोती है बस? मुझे किस का दुख है? मुझे पूछ तू फिर बताऊँ तेरा नाम मैं और तुझे मैं सुनाऊँ दिखाऊँ मेरा ग़म मेरे ज़ख़्म जो भर नहीं पा रहे हैं मुझे तेरे ऐसे सताने का दुख है तेरे लौट के फिर न आने का दुख है मेरे पास आ मेरा दुख जान लड़की सखी कोई इतना ख़फ़ा भी नहीं होता है जैसे कि तू है कि ग़ुस्सा ज़ियादा दिनो तक नहीं करना होता है समझी ए लड़की कि ग़लती भुलाने के ख़ातिर बनी है मोहब्बत निभाने के ख़ातिर बनी है कि जब दोस्ती कर ली जाए उसे फिर निभाना भी होता है लड़की मुझे याद है तू मगर मैं भुलाया गया हूँ तू बेशक मुझे छोड़ दे पर ज़रा सुन कहीं भी कभी भी किसी भी हाँ दरिया ने प्यासे को प्यासा नहीं मारा है फिर तो अब तू चली आ घड़ी हाथ की बंद हो जाए इस सेे के पहले चली आ मेरे हाथ को थाम ले दोस्त ये ज़िंदगी बाय बोले मुझे इस सेे पहले तू आ और मुझे तू गले से लगा ले — BR SUDHAKAR
"ब्लैक एंड व्हाइट तस्वीर" सोच नहीं सकता था मैं इक रंग मेरे सब होश उड़ा सकता है सोच नहीं सकता था ख़ुदा किसी को इतना भी हसीन बना सकता है दोस्त तेरी तस्वीर को देख लगा है कुछ यूँँ जैसे चंदा रात को झील में अपना अक्स बना दे और धीरे-धीरे उस में चलने लग जाए फिर रुक जाए और हसने लग जाए तेरी ही तस्वीर से ऐसा ख़याल आया है दुनिया गर ब्लैक एंड व्हाइट ही, होती तो कुछ ख़ास हसीन, ये होती ये बस इक तस्वीर नहीं है एक अलग सी बात है इस में वो जो शायद कहीं नहीं है जो इन फूलों के रंगों में नहीं हैं जो जंगल में नहीं है जो शहरों में नहीं है जो महलों में नहीं है ये वो है जो अब तक देखा नहीं है तेरी ये तस्वीर वो जादू है जिस को दिखा कर जादूगरों ने सब को हैरत में डाला हुआ है दोस्त ज़ुल्फ़ तेरी नागिन है लब दरिया में रक्खे उन सीपी के जैसे हैं जो खुल जाए तो बस मोती ही मोती चेहरा भोला है आँखें बिजली हैं कोई परी है तू कहने को लड़की है हाए नज़र न तुझे लग जाए कोई यार तू इतनी हसीन है तू शाइ'र का दीन है तू कितनो का यक़ीन है गर अपनी तस्वीर तू खोल दे तो फिर तेरे दिलबर इतने हो जाएँगे लोग ख़ुदा को छोड़ तेरे ही पास चले आएँगे तेरी इक तस्वीर से जंग कराई जा सकती तेरी इक तस्वीर से एक अलग कोई दुनिया बनाई जा सकती है ये बस ब्लैक एंड व्हाइट रंग में इक तस्वीर नहीं है तू ये पूछ कि क्या ये नहीं है ? जिस की काट नहीं हो ऐसी हक़ीक़त है ये सबके ख़ुदा की ज़ियारत है ये भटके हुए को सुकूनत है ये मिल के सब अच्छा हो जैसे क़िस्मत है ये जिस के बगैर अदीब नहीं हो शाइ'र की वो ज़रूरत है ये ख़ुद में से'आदत है ये मुझ को सरवत है ये भोली शरारत है ये पाक मोहब्बत है ये सारी आयत है ये सारी रहमत है ये सब के दिल पे हुकूमत ये है इस शाइ'र की रंगत है ये ये बस इक तस्वीर नहीं है — BR SUDHAKAR
हम दोनो घर चल देंगे हाथ पकड़ कर रख मेरा सर सीने पर रख मेरा यक़ीन तू कर, तू कहीं जाने वाला नहीं है वेंटिलेटर कम पड़ जाए तो क्या ? अपने हाथों को वेंटिलेटर, मैं बना दूँगा मैं तेरी सांसो की ख़ातिर सच में सनम मैं अपनी सांसे तक गिरवी रख दूँगा मैं रब से झगड़ा कर लूंगा पर कैसे भी मैं तुझ को जाने नहीं दूँगा तू घबरा मत सब कुछ ठीक हो जाएगा जैसे पहले था सब वैसा हो जाएगा तू रो मत इतनी सी तो बात है, और इतना कुछ तो हम ने साथ में झेला है और फिर इक दिन ये भी दुख चला जाएगा ऐसा समझो हम एक जंग में है ऐसा जानो हम जीतेंगे बस तू अपना हौसला मत जाने देना बाकी तो तू मुझ पर छोड़ दे सब कुछ मैं हूँ ना !! क्यूँ फिक्र तू करती है ? जैसे कट जाता है हर इक दिन वैसे ये दिन भी कट जाएगा ये अँधेरा धीरे-धीरे हट जाएगा फिर से सहर होगी हमनें कितना कुछ जीना है अभी तो अपना वेट भी करता होगा, घर अपना तेरी बातों में फिर से खोना है मुझे तेरे साथ अभी कितना हँसना है मुझे मैं ने तेरे हाथों का खाना फिर से खाना है तू टेंशन मत रख हम जल्दी ही घर चल देंगे तुझ को कुछ नहीं होगा बस कुछ दिन की बात है फिर हम दोनो घर चल देंगे — BR SUDHAKAR
"कब" कब ये पेड़ हरे होंगे फिर से कब ये कलियाँ फूटेंगी और ये फूल हसेंगे कब ये झरने अपनी प्यास भरेंगे कब ये नदियाँ शोर मचाएँगी कब ये आज़ाद किए जाएँगे सब पंछी कब जंगल साँसे लेंगे कब सब जाएँगे अपने घर कब हाथों से ज़ंजीरें खोली जाएँगी कब हम ऐसों को पूछेगा कोई और ये फ़क़ीरों को भी क़िस्से में लाया जाएगा कब इन काँटों की भी क़ीमत होगी और मिट्टी सोने के भाव में आएगी कब लोगों की ग़लती टाली जाएगी कब ये हवाएँ पायल पहने झूमेगी कब अंबर से परियाँ उतरेंगी कब पत्थरों से भी ख़ुशबू आएगी कब हंसों के जोड़ें नदियों पे बैठेंगे बरखा गीत बनाएगी और मोर उठा के पर कत्थक करते देखे जाएँगे नीलकमल पानी से इश्क़ लड़ाएंगे मछलियाँ ख़ुशी के गोते मारेंगी कब कोयल की कूक सुनाई देगी कब भॅंवरे फिर गुन- गुन करते लौटेंगे बागों में और कब ये प्यारी तितलियाँ कलर फेकेंगी फिर सब कुछ डूबा होगा रंगों में कब ये दुनिया रौशन होगी कब ये जुगनू अपने रंग में आएँगे कब ये सब मुमकिन है कब सबके ही सपने पूरे होंगे कब अपने मन के मुताबिक़ होगा सब कुछ कब ये बहारें लोटेंगी कब वो तारीख़ आएगी बस मुझ को ही नहीं सब को इंतिज़ार है तेरे ' बर्थडे ' का — BR SUDHAKAR
उस का चेहरा सिंपल सादा सा भोला चेहरा है यार क़सम से वो प्यारा चेहरा है पेड़ नदी ये फूल सभी छोड़ो उस को देखो उस का चेहरा है दुनिया लाख हसीन हो सकती है लेकिन उस का चेहरा चेहरा है देख उसे कह डाला हम ने भी बातें प्यारी हैं प्यारा चेहरा है इक तिल होट पे, गाल के नीचे इक और वो चाँद सा नाक पे नूर लिए दो प्यारी आँखें, और सुर्ख़ से लब प्यार मिलाकर अपना रंगों में हम ने बनाया उस का चेहरा है भोली सूरत पे वो अकड़ देखो ग़लती कर के घुमाया चेहरा है रूठ गई जो हम सेे कभी वो दोस्त सब सेे पहले चुराया चेहरा है जब भी उस को चूमने आए हम होट से पहले आया चेहरा है मुँह से इक वो स्वाद नहीं जाता जबसे उस का चूमा चेहरा है रात का होना उस की आँखें हैं दिन का निकलना उस का चेहरा है दुनिया में है उस के चेहरे से है नूर रौशनी लाया उस का चेहरा है हम जैसे भी दरिया करेंगे पार ! अब जो सहारा उस का चेहरा है हम आबाद रहेंगे ऐसे ही हम पे गर साया वो चेहरा है वो चेहरा है बस वो चेहरा है हम को बस वो चेहरा चेहरा है हम ने चाहा बस वो चेहरा है हम ने माँगा बस वो चेहरा है हम ने देखा भी तो वो चेहरा हम ने सोचा बस वो चेहरा है — BR SUDHAKAR