@Fuzail_Khan
Fuzail Khan shayari collection includes sher, ghazal and nazm available in Hindi and English. Dive in Fuzail Khan's shayari and don't forget to save your favorite ones.
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है यही आरज़ू-ए-नफ़स और क्या
एक लम्हा मोहब्बत का बस और क्या
दिल परिंदे को अब और क्या चाहिए
तेरी नज़दीक़ियों का क़फ़स और क्या
तेरे क़दमों से जो गलियां वाक़िफ थीं
उनसे रिश्ता एक पुराना तोड़ दिया
तुम क्या जानो उन गलियों पर क्या गुज़री
तुमने तो बस आना-जाना छोड़ दिया
जब से तुमने मिलना-जुलना छोड़ा है
हमने भी फिर सांसें भरना छोड़ दिया
तुम क्या जानो मेरे दिल पर क्या गुज़री
तुमने तो बस बातें करना छोड़ दिया
यही इक बात रह-रहकर मिरे दिल को सताती है
कि आख़िर क्यों वो रोया था बिछड़ने से ज़रा पहले
वो जब मिलेंगे तो ये बात उनसे पूछेंगे
कि मिल के आपसे क्यों दुनिया भूल जाते हैं
निगाह ए ग़ौर से देखो बड़े मजबूर हैं हम
उसी के पास में बैठे हैं जिससे दूर हैं हम
हमेशा की तरह फिर इक अधूरा ख़्वाब देखा है
हमेशा की तरह फिर से किनारा कर लिया तुमने
अपना भी है लेकिन वो पराया भी बहुत है
उस शख़्स को हाँ हमने सताया भी बहुत है
तिरी नज़रों से जो ख़ुद को अभी देखा हमने
हर ख़ामी में मुझको खू़बी नज़र आने लगी
जितना होना था हो चुकी बारिश
अब तो सब कुछ भिगो चुकी बारिश
वो जो छोड़ी थीं नांवें बचपन में
उनको कब का डुबो चुकी बारिश
तिरी-मेरी ये दूरी कह रही है
कहानी फिर अधूरी रह गई है
अभी आंगन में बैठे तो ख़्याल आया
कि बातें सब ज़रूरी रह गई हैं
कुछ घर अन्दर से बाहर तक जगमग-जगमग रहते हैं
कुछ घर के आंगन में केवल एक दीया ही जलता है
इस सोच में बैठे कि मिरी सोच का हर पल
किस सोच में गुज़रा है यही सोच रहा हूँ