Vaseem 'Haidar'

Vaseem 'Haidar'

@vaseemali543

Vaseem Rukh shayari collection includes sher, ghazal and nazm available in Hindi and English. Dive in Vaseem Rukh's shayari and don't forget to save your favorite ones.

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Sher

हो गई थी हमें मोहब्बत दोस्त फिर हमें खा गई नसीहत दोस्त — Vaseem 'Haidar'
ज़िंदगी मेरी जैसी किसी की न हो हो अगर ऐसी तो ज़िंदगी ही न हो — Vaseem 'Haidar'
आँसू आ गए हैं आँखों में कोई तो बात है यारो आज मेरी जान की सुहागरात है — Vaseem 'Haidar'
सोचता हूँ ये चलती राहों में बैठी होगी वो उस की बाहों में — Vaseem 'Haidar'
तुम न होते हुसैन तो हम सब वक़्त के मारे किस के दर जाते — Vaseem 'Haidar'
नाम मेरा नहीं लिया उस ने क्या सुनाऊँ ये हाल-ए-दिल अपना — Vaseem 'Haidar'

Ghazal

सच कहूँ तुम सेे मोहब्बत हो रही है क्या ख़ुदा की ये इनायत हो रही है तुम मिरी ये बात मानो या न मानो अब तुम्हारी मुझ को आदत हो रही है मैं हुआ बर्बाद इक उन की दुआ से इस लिए घर उन के दावत हो रही है लौट आए देख कर ये माज़रा हम वाँ मोहब्बत की तिजारत हो रही है कह दिया बस इतना मैं ने वो मिरी है तब से महफ़िल में वकालत हो रही है ऐसा तुम ने क्या किया है कुछ तो बोलो क्यूँँ तुम्हारी ये शिकायत हो रही है आज कल में उस की हो जाएगी शादी अब तो वो लड़की से औरत हो रही है सल्तनत उस की है तो उस के हुए सब सल्तनत में क्यूँँ बग़ावत हो रही है — Vaseem 'Haidar'

Nazm

''मशवरा'' तुम हम सेे मोहब्बत क्यूँ कर बैठी हो तुम्हें इल्म है हम किसी और से मोहब्बत करते हैं मगर तुम्हारे दिल में क्या आया कि तुम हम सेे मोहब्बत कर के बैठी हो देखो अब ये हमारा दिल किसी का नहीं हो सकता देखो तुम मासूम हो अभी कमसिन उम्र हो अभी तुम मोहब्बत के जाल में पड़ी नहीं हो अभी तुम्हारे ख़ुश रहने के दिन हैं मोहब्बत कर के तुम बर्बाद हो जाओगी याद बहुत करोगी लेकिन रोटी कम खाओगी फूल जैसे चेहरे को क्यूँ मुरझाना चाहती हो सच बताओ क्यूँ हमारे क़रीब आना चाहती हो हम किसी की फ़ुर्क़त में रोज़-ओ-शब रोते हैं धीरे धीरे उस की सारी यादों को धोते हैं तुम्हारे गेसू काली घटाएँ तुम्हारे लब और तुम्हारी अदाएँ अपने दिल को कैसे भी समझाओ जान-ए-मन तुम हम को भूल जाओ — Vaseem 'Haidar'
"तसव्वुर" तुम ने तो कितने वादे किए थे कि मैं शादी तुम सेे करूँँगी तुम्हारी बाहों में जिऊँगी मरूँगी और कितनी बार मैं ने भी कहा था तुम मुझे छोड़ना मत लेकिन तुम ने मेरी एक न सुनी अब तो तुम्हारे तसव्वुर की महफ़िल सजाता हूँ तुम्हारी यादों को अपने हुजरे में बुलाता हूँ और अब तो तुम मेरे ख़्वाबों में हर रोज़ आने लगी हो हक़ीक़त में तो न सही लेकिन ख़्वाबों में सताने लगी हो लेकिन तुम सेे एक गिला है तुम तो चली गई मगर यादों को न ले गई तुम्हारी याद मुझे धीरे-धीरे खा रही है तुम्हारी बे-वफ़ाई से मेरी जान जा रही है आख़िर तुम किस की बातों में आ गई मेरी मोहब्बत को तुम ठुकरा गई ये तो मैं ने सोचा भी नहीं था कि ऐसा मोड़ आएगा चाहता हूँ जिस को वही दिल तोड़ जाएगा मैं ने तो अपने दिल को मशवरा दे दिया मगर मेरी जाँ तुम ने किस को दिल में दाख़िला दे दिया सुनो तुम सेे ये उम्मीद बिल्कुल नहीं की थी मैं ने लेकिन तुम ने वो भी कर दिखाया अब मोहब्बत मुझे अच्छी नहीं लग रही जाने क्यूँ जब कोई मोहब्बत की बात करता है तो मुझे तुम्हारे वो वादे याद आ जाते हैं तुम को इतना ध्यान रहे तुम ख़ुदा नहीं हो लोग पूछते हैं तो कह देता हूँ कि तुम बे-वफ़ा नहीं हो — Vaseem 'Haidar'
“निशानी” एक भी तुम्हारी तस्वीर पुरानी नहीं मेरे पास तुम्हारी कोई निशानी नहीं तुम ने हर बार मुझे झूठे दिलासे दिए मैं वो सब हक़ीक़त समझता रहा अब ये बात किसी को सुनानी नहीं मेरे पास तुम्हारी कोई निशानी नहीं अब तो तुम्हें कोई और पसंद आ गया होगा अब तो तुम उसे ही सोचती रहती होगी मुझे ख़बर है तुम मेरी दिवानी नहीं मेरे पास तुम्हारी कोई निशानी नहीं गर मुझे छोड़ना ही था तो मुझे ख़्वाब क्यूँ दिखाए बुझते हुए दिए को इक उम्मीद क्यूँ दी मैं तो अपनी सुद्द-बुद में खोया था तुम्हें क्या ख़बर मैं तुम्हारी ख़ातिर कितना रोया था आग दिल में जो है वो बुझानी नहीं मेरे पास तुम्हारी कोई निशानी नहीं जाते-जाते तुम ने इक बार भी मेरी ख़बर न ली बरसों पहले तुम ने मुझ सेे किनारा कर लिया अब यादों की मय्यत उठानी नहीं मेरे पास तुम्हारी कोई निशानी नहीं — Vaseem 'Haidar'
'तुम्हारी याद' बहुत दिन हो गए हैं तुम ने मुझ सेे बात नहीं की क्या तुम्हें मेरे बिना रहना आ गया है मगर मुझे तो आज तक रहना नहीं आया तुम्हारी याद बहुत सताती है तुम्हारी याद बहुत आती है मगर ये सब तुम सेे अब कहूँगा नहीं और ज़ुल्म तुम्हारे अब सहूँगा नहीं अब तुम सेे कोई शिकायत नहीं करेगा इक लड़का तुम्हारे बिन रह लेगा किस पर तुम ने ज़ुल्फ़ों से बिजली गिराई होगी क्या जान-ए-जाँ तुम को मेरी याद आई होगी मगर तुम बात करने से कतराती हो सो मैं तुम्हारे लायक़ तो बिल्कुल भी नहीं तुम दूर से ही मुझ सेे इतराती हो जाओ मैं तुम को अब भूलने लगा हूँ तुम्हारी नज़र में तो मैं बरसों से मरा हूँ — Vaseem 'Haidar'