इक उस सेे मिलने की घड़ी जाती रहीआँखों की फिर ये रौशनी जाती रहीवो छोड़ के मुझ को बहुत ख़ुश है वहाँऔर उस के ग़म में जाँ मिरी जाती रही— Vaseem 'Haidar'