100rav

100rav

@100rav

100rav shayari collection includes sher, ghazal and nazm available in Hindi and English. Dive in 100rav's shayari and don't forget to save your favorite ones.

Followers

25

Content

258

Likes

611

Shayari
Audios
  • Sher
  • Ghazal
  • Nazm

Sher

किसी ने नाम पूछा और गोली मार दी लेकिन ग़लत वो है जिन्होंने नाम पूछा कुंभ मेले में — 100rav
नहीं मिलती सज़ा भी बे-वफ़ाई की हाँ जब तक तुम वफ़ादारी नहीं करते — 100rav
उदासी ओढ़ कर इक शख़्स जब सब ठीक कहता है कुरेदो तो दिखेगा पेड़ को दीमक ने खाया है — 100rav
मैं जूते घिसके पहुँचा जैसे तैसे तो जूते चाटने वाले मिले सब — 100rav
वो तस्वीरें जो हम ने साथ खींची थी उन्हें मैं देखता हूँ अब अकेले में — 100rav
दर्द ऐसा सोचता हूँ टूट जाऊँ डर है सब कमज़ोर बोलेंगे मुझे फिर — 100rav
शजर सूखा तो बदला घोंसला चिड़िया ने हर दम पर वहीं चिड़िया अगर जाए शजर फिर सूख जाता है — 100rav
बे-वफ़ा कहके मुँह फेरने वाला जो फिर पलट कर के देखे तो कम-ज़र्फ़ी है — 100rav
मेरी चाहत किसी आँगन की तुलसी है मैं कैसे घर में लाऊँ माँ कोई तुलसी — 100rav
तेरी जैसी कोई दिख जाती है तो देख लेता हूँ कहीं तू दिख गई तो बस नज़र-अंदाज़ कर दूँगा — 100rav
हज़ारों साल पहले वाले डायर वुल्फ़ लाए हो बताओ आशिक़ों को पहले जैसा कब बनाओगे — 100rav
दिन मुहब्बत के कम ही होते हैं देख लो माह फ़रवरी का ही — 100rav
कहा टूटे हुए शीशे ने मुझ सेे कहीं टुकड़ों को तुम ही चुभ न जाना — 100rav
जौन को पढ़ कर ये अंदाज़ा हुआ बहर में लिखना ग़ज़ल-गोई नहीं — 100rav
ज़रूरत बा'द तू चीज़ें जलाता था मैं ज़िंदा हूँ मगर क्या तू सलामत है — 100rav
सभी कहते हैं दुनिया गोल है तो तू फिर से क्यूँ नहीं टकराता मुझ सेे — 100rav
राह तकता हूँ मैं उस के मायके आने का हर साल पहली बारिश आज भी मिट्टी में भर देती है ख़ुशबू — 100rav
ये जो भागते जा रहे हो कहाँ जाना है कुछ पता है — 100rav
बे-वफ़ा लड़की के ग़म में एक लड़का बे-वफ़ाई कर गया माँ बाप के साथ — 100rav
निशाँ पत्थर पे थे तो बच गए वरना मिटा देते किताबों से हमें ये लोग — 100rav

Ghazal

Nazm

"मुहब्बत का दुख" प्यार, न जता पाने का दुख उस को पता लग जाए तो उस की नाराज़गी फिर उस सेे नज़र अंदाज़ होना सब सेे पाक चीज़ मुहब्बत करने के लिए मुआ'फ़ी फिर उस की नफ़रत का दुख हाए रे ये मुहब्बत का दुख सोचना कम से कम उस का दोस्त बन के जी लूँ ता-'उम्र ऐसा फिर न होगा ये समझाना वो नहीं मेरी ख़ुद को समझाना कभी रोते हुए रात काटना कभी रोते हुए रात का मुझे काटना मैसेज करो तो घंटो रिप्लाई नहीं गिरती हुई अपनी 'इज़्ज़त का दुख हाए रे ये मुहब्बत का दुख तू उस की बन मुझे ग़म नहीं मुझे मुहब्बत करने से न रोक मैं तुझे मुहब्बत बिना देखे बिना छुए बिना तकलीफ़ दिए भी कर सकता हूँ वो करने दे ये हक़ है मेरा दिक़्क़त है तो बता इस सेे भी मैं दूर कर लूँगा ख़ुद को लेकिन तुझे कभी तकलीफ़ नहीं दूँगा झेल लूँगा मैं हिजरत का दुख नहीं होने दूँगा तुझे मुहब्बत का दुख — 100rav
“मोशमी” मैं कबूतर तो वो खिड़की है मोशमी चाहता हूँ मैं वो लड़की है मोशमी इस ज़माने से क्यूँ डरती है मोशमी अब ग़लत से निडर लड़ती है मोशमी हीरे जैसी वो अब चमकी है मोशमी ज़ुल्म अब तो नहीं सहती है मोशमी मैं क़दम जैसे तो धरती है मोशमी जैसे बारिश यहाँ पहली है मोशमी नूर तारों में भी भरती है मोशमी देखने में परी दिखती है मोशमी यार क्या अब कहूँ कैसी है मोशमी सोचा था जैसी बस वैसी है मोशमी साथ सौरभ के बस जँचती है मोशमी पर लगन में किसी बहकी है मोशमी इन दिनों जाल में उस की है मोशमी लौट आ दिल की गर सुनती है मोशमी मत समझ इश्क़ जिस्मानी है मोशमी प्यार से बढ़ के तू पत्नी है मोशमी देर की तू ने अब गर्दी है मोशमी देख आई मेरी अर्थी है मोशमी — 100rav
''यक़ीन है मुझे'' यक़ीन है मुझे ख़ुद पर तुझ पर और उस ख़ुदा पर तू मिलेगा फिर वहीं छोड़ गया था जहाँ पर मैं एकतरफ़ा प्यार शिद्दत से निभाऊँगा तू नहीं चाहती तो मेरे मरने की दुआ कर सब तो मिट्टी होंगे चाहे दफ़नाकर या जलाकर तू भी मिलेगा फिर वहीं छोड़ गया था जहाँ पर यक़ीन है मुझे ख़ुद पर तुझ पर और उस ख़ुदा पर मैं और याद आऊँगा ये मेरा वा'दा है तुझ सेे तू एक बार भूलने की कोशिश तो कर भुलाकर मर जाऊँगा तो ये जिस्म तो सो जाएगा क़ब्र में मगर मुहब्बत रूह को ले कर आएगी शायद जगाकर इस लिए भी मैं ने तुझे जाने दिया था उस के पास मज़ा ही क्या किसी को पाना वो भी रुला कर तू याद भी कर ले तो बस मुझे इश्क़ मुकम्मल है चल याद कर ले मुझ को तू इतनी सी दया कर मेरा इश्क़ देख कर ख़ुदा अगले जनम ये करेगा तेरा मेरा नाम साथ लिख देगा उस का मिटाकर यक़ीन है मुझे ख़ुद पर तुझ पर और उस ख़ुदा पर तू मिलेगा फिर वहीं छोड़ गया था जहाँ पर — 100rav
"वो मैं हूँ" फूलों के बाग़ों से चले तो जो सहरा कर देता है वो मैं हूँ ज़ख़्म पे दवाई लगाकर ज़ख़्म गहरा कर देता है वो मैं हूँ अच्छे लोग भागते हैं मुझ सेे और कभी शरीक नहीं होने देते बारात त्योहार या अच्छे ख़ासे जलसे का जो बुरा कर देता है वो मैं हूँ तुम मेरा नाम लेना और देखना क़िस्मत तुम्हारी भी फूट जाएगी नए जन्में बच्चे को गोद में ले के बूढ़ा या अधमरा कर देता है वो मैं हूँ मेरे घर वालों ने भी मुझे इस लिए ही कच्ची उम्र में फेंक दिया था नासूर बीमारी से जो घर बिकवाकर क़र्ज़ा कर देता है वो मैं हूँ शैतान भी आधी रात में मेरा नाम लेने से घबराता है अब तो जो अपनी इक आँख बंद कर दज्जाल सा चेहरा कर देता है वो मैं हूँ ख़ुदा ने इस लिए मुझे बद सेूरत बनाया कि कोई पसंद न करे वो मनहूस परछाई जो दिन में अँधेरा कर देता है वो मैं हूँ मैं वो इंसान हूँ जो सजदे नहीं करता बस नशे करता है जो हवस को मुहब्बत बना कर मिट्टी को ख़ुदा कर देता है वो मैं हूँ — 100rav
"मैं सोचता हूँ" बैठे बैठे बात ये मैं सोचता हूँ मेरी क़िस्मत क्यूँ नहीं उस के ही जैसी सुब्ह होते करती हो मैसेज जिस को उस का दिन बन जाता होगा और उस को कोई भी तकलीफ़ थोड़ी होती होगी 'इत्र तो अब वो लगाता भी न होगा हाँ गले जो तुम लगाती हो उसे अब राब्ता भी करते होंगे सब कि ख़ाली बेचे उन को ही पसीने वस्ल वाले बनते हैं दोनों के ही अब दरमियाँ से तुम उसे जो छूती हो तो देखना अब लक़्वा सारी उम्र मारेगा ही कैसे क्योंकि मुझ को याद है जब आई थी घर और हम सोए थे जिस खटिये पे उस में थे उड़स जो फिर कहीं गुम हो गए और मेरे घर में इक अलग सी थी रवानी सुब्ह लोगों ने कहा हीरा मिला क्या रात भर उस की चमक थी मेरे घर में ख़ैर अब उस को सभी ये कहते होंगे पूछते हैं लोग कि हीरा कहाँ है बेचा क्यूँ उस लड़के को और कितना पाया मैं परेशाँ हूँ इन्हें क्या ही बताऊँ सिर्फ़ हीरा ही नहीं वो मेरी जाँ है नूर है वो ज़िंदगी का मेरे लेकिन उस ने ठाना है मुझे तोड़ेगी ऐसे आइना जैसे गिरे सौ फ़ीट से तो मेरी भी ख़्वाहिश यही बस रह गई है टूट के उस के ही हाथों है बिखरना कौन पागल चाहता है ऐसे जीना ये बदन होगा अकेला क़ब्र में पर दूर उस सेे मर के रहना अच्छा होगा — 100rav
"शा'इरी या बीवी" है घर इन झड़ते बालों से परेशाँ, सभी शादी की बस ज़िद कर रहे हैं, यहाँ मेरी मुहब्बत शा'इरी है, अगर शादी का दिन तय हो गया तो, मुहब्बत मुँह बना कर ग़ुस्से में ही, चली जाएगी मुझ को छोड़कर तो, न आऊँगा किसी के काम में भी, मैं तो बस शा'इरी का ही हूँ लोगों, ये सूरज चाँद से तो दूर रह ले, मगर बिन रौशनी क्या ही करेगा, कोई समझाए घर वालों को ये सब, यही डर खा रहा है मुझ को अब तो, मेरे घर वाले शादी करवा ही देंगे, ख़ुदा अगले जनम भी फ़न यही देना, मुझे बेकस बनाना रखना बेघर, कोई इक ज़िंदगी शाइ'र रहूँ बस, मुझे इस बात की चिंता न हो तब, चुनूँ क्या शा'इरी या बीवी में से, बिताऊँ ज़िंदगी बस शा'इरी में — 100rav