100rav
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Ghazal

तू उस का पहले से था ग़लती मेरी थी

ख़ुदा से फिर भी माँगा ग़लती मेरी थी

तेरी शादी का हाँ तू ने बताया था
ख़बर थी फिर भी चाहा ग़लती मेरी थी

बदल जाती है क़िस्मत एक पल में भी
था मैं ने ऐसा सोचा ग़लती मेरी थी

तू सब से प्यार से ही बात करती है
हाँ मैं ने प्यार समझा ग़लती मेरी थी

तू किस के साथ भी घू
में मुझे क्या पर
मैं हो जाता था ग़ुस्सा ग़लती मेरी थी

सदा ख़ुश रखना दोनों को मेरा क्या है
पता सब है न कान्हा ग़लती मेरी थी

तेरे जाते ही मिलने मौत आए काश
तू अर्थी पे न रोना ग़लती मेरी थी

— 100rav

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