haal hai ab bad se badtar qarze men | हाल है अब बदस बदतर क़र्ज़े में

  - 100rav

हाल है अब बदस बदतर क़र्ज़े में
फ़ोन मैं और है मेरा घर क़र्ज़े में

आस अच्छे साल का देकर ये फिर
डूब जाता है दिसंबर क़र्ज़े में

उन पहाड़ों से निकलकर मिलती है
ये नदी या है समंदर क़र्ज़े में

पहले जैसे कौन ख़त है भेजता
चुग के दाना है कबूतर क़र्ज़े में

याद है क्या रात तुमको सर्द की
आज भी है एक चद्दर क़र्ज़े में

ज़िंदगी में उस सेे तू कुछ पल मिला
देख सौरभ अब मुक़द्दर क़र्ज़े में

  - 100rav

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