100rav
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Ghazal

नहीं ऐसा कि मैं नस काट लूँगा

हाँ ग़म में ज़िंदगी बस काट लूँगा

तू ख़ुश रहना मेरी चिंता न करना
कि ऐसे ज़ीस्त और दस काट लूँगा

मेरी बातें दे गर दुख तो बताना
मैं तब नस हो के बेबस काट लूँगा

मिलाया हाथ था तो सोच कर उम्र
छुआ लोहे ने पारस काट लूँगा

— 100rav

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