"मुहब्बत का दुख"
प्यार, न जता पाने का दुख
उस को पता लग जाए तो
उस की नाराज़गी फिर
उस से नज़र अंदाज़ होना
सब से पाक चीज़ मुहब्बत
करने के लिए मुआ'फ़ी
फिर उस की नफ़रत का दुख
हाए रे ये मुहब्बत का दुख
सोचना कम से कम उस का
दोस्त बन के जी लूँ ता-'उम्र
ऐसा फिर न होगा ये समझाना
वो नहीं मेरी ख़ुद को समझाना
कभी रोते हुए रात काटना
कभी रोते हुए रात का मुझे काटना
मैसेज करो तो घंटो रिप्लाई नहीं
गिरती हुई अपनी 'इज़्ज़त का दुख
हाए रे ये मुहब्बत का दुख
तू उस की बन मुझे ग़म नहीं
मुझे मुहब्बत करने से न रोक
मैं तुझे मुहब्बत बिना देखे
बिना छुए बिना तकलीफ़
दिए भी कर सकता हूँ
वो करने दे ये हक़ है मेरा
दिक़्क़त है तो बता इस से भी
मैं दूर कर लूँगा ख़ुद को लेकिन
तुझे कभी तकलीफ़ नहीं दूँगा
झेल लूँगा मैं हिजरत का दुख
नहीं होने दूँगा तुझे मुहब्बत का दुख















