"तुम फिर चली जाना"
कुछ दिन बाक़ी है
जीने को काफ़ी है
थोड़ा और सताना
तुम फिर चली जाना
बस अब यही है पाना
साथ तस्वीर खींचवाना
ज़िंदा रहूँ इस के लिए
इक बार गले लग जाना
इतना बस रिश्ता निभाना
तुम फिर चली जाना
महफ़िल में शे'र पढूँगा
शे'र में तेरा नाम कहूँगा
नहीं तेरी बदनामी होगी
ये पाँच साल बा'द करूँगा
महफ़िल बनकर मुस्कुराना
तुम फिर चली जाना
ख़ुश रहूँगा चैन से सोना
याद आए तो थोड़ा रोना
इस जनम तू उस की हो जा
किसी जनम बस मेरी होना
कहीं मिलना तो चेहरा छुपाना
तुम फिर चली जाना
— 100rav















