करूँँ कैसे मुहब्बत पे भरोसा
नहीं है उस की क़ुर्बत पे भरोसा
नई हो रात तो फिर इक नया मर्द
मुझे था ऐसी औरत पे भरोसा
मैं रोता था वो मेरा क्यूँ नहीं है
हुआ है मुझ को क़ुदरत पे भरोसा
नहीं आना तू मुड़ के ओ फ़रेबी
ये दिल कर लेगा सूरत पे भरोसा
तू फिर से अब कभी मत करना 'सौरभ'
उड़ाकर सिक्का क़िस्मत पे भरोसा
— 100rav















