मुझे तो आजकल है सिर्फ़ एक काम मोशमी
हाँ लिखता हूँ मिटाता हूँ तेरा ही नाम मोशमी
मुझे पड़ोस और घर के लोग सनकी कहते हैं
पुकार कैसे सकता हूँ मैं सुब्ह शाम मोशमी
ख़ुदा को क्या बुलाना ही पड़ेगा इस ज़मीं पे अब
मैं थक गया हूँ तुझपे पढ़ के अब कलाम मोशमी
मेरी यही है आरज़ू तू समझे मेरे 'इश्क़ को
जो तेरा 'इश्क़ है तू उसका हाथ थाम मोशमी
तेरा ये जिस्म 'इश्क़ वक़्त सब उसे दे ग़म नहीं
अगर वो तेरा शाह तो मैं हूँ ग़ुलाम मोशमी
मैं उन
में से नहीं जो गाली 'इश्क़ को गँवा के दे
दुआ है दोनों पाओ ऊँचा सा मक़ाम मोशमी
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