kisi ik din nahin har pal nahin hota | किसी इक दिन नहीं हर पल नहीं होता

  - 100rav

किसी इक दिन नहीं हर पल नहीं होता
हाँ उसकी आँख में काजल नहीं होता

सँवरती तो नहीं पर हूर जैसी है
मैं ऐसे ही कभी पागल नहीं होता

हमारी दोस्ती से चिढ़ने वाले सुन
कँवल के पास क्या दलदल नहीं होता

दिखा था बाल उसके आँख के नीचे
हटा देता मगर कस-बल नहीं होता

हुई है उसकी अब आकाश से यारी
समा में ग़म का अब बादल नहीं होता

मिलाती हाथ है सब सेे सिवा मेरे
तभी दिन दीन का मख़मल नहीं होता

  - 100rav

Zulf Shayari

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