100rav
100rav
Ghazal

मेरा ख़्वाब ख़्वाबी नहीं है

हाँ तू अब निसाबी नहीं है

तुझे कल दिए थे जो भी फूल
बता क्यूँ गुलाबी नहीं है

ख़ुदा रहम वो बे-वफ़ा है
कोई और ख़राबी नहीं है

तू आ खोल क़िस्मत का ताला
ये मत कह कि चाबी नहीं है

बता क़र्ज़ में क्यूँ है तू जब
जुआरी शराबी नहीं है

मेरे शे'र पे वाह तो कर
मेरे हैं किताबी नहीं है

नमीं है जो लफ़्ज़ों में मेरे
ये आँसू है आबी नहीं है

— 100rav

More by 100rav

Other ghazal from the same pen

See all from 100rav →

Similar writers

Voices in the same orbit

Browse by mood

Poetry by feeling