100rav
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Ghazal

किसी ग़ैर घर में ठिकाना ग़लत है

लगाकर ये दिल उस से जाना ग़लत है

ग़लत हूँ अगर तो ख़ुदा साँप वाला
हाँ ऐसा ख़ज़ाना दिखाना ग़लत है

नहीं था वो मेरा तो फिर क्यूँ मिलाया
ख़ुदा तेरा ऐसे मिलाना ग़लत है

मुझे बद-दु'आ दी कि अच्छी मिलेगी
हाँ मुर्दे को पानी पिलाना ग़लत है

कहा उस ने तुम ऐसा मत करना 'सौरभ'
बिना साँस अब मर भी जाना ग़लत है

— 100rav

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