"वो मैं हूँ"
फूलों के बाग़ों से चले तो जो सहरा कर देता है वो मैं हूँ
ज़ख़्म पे दवाई लगाकर ज़ख़्म गहरा कर देता है वो मैं हूँ
अच्छे लोग भागते हैं मुझ से और कभी शरीक नहीं होने देते
बारात त्योहार या अच्छे ख़ासे जलसे का जो बुरा कर देता है वो मैं हूँ
तुम मेरा नाम लेना और देखना क़िस्मत तुम्हारी भी फूट जाएगी
नए जन्में बच्चे को गोद में ले के बूढ़ा या अधमरा कर देता है वो मैं हूँ
मेरे घर वालों ने भी मुझे इस लिए ही कच्ची उम्र में फेंक दिया था
नासूर बीमारी से जो घर बिकवाकर क़र्ज़ा कर देता है वो मैं हूँ
शैतान भी आधी रात में मेरा नाम लेने से घबराता है अब तो
जो अपनी इक आँख बंद कर दज्जाल सा चेहरा कर देता है वो मैं हूँ
ख़ुदा ने इस लिए मुझे बद सेूरत बनाया कि कोई पसंद न करे
वो मनहूस परछाई जो दिन में अँधेरा कर देता है वो मैं हूँ
मैं वो इंसान हूँ जो सजदे नहीं करता बस नशे करता है
जो हवस को मुहब्बत बना कर मिट्टी को ख़ुदा कर देता है वो मैं हूँ















