Meaning of

नासूर

naasoor • ناسور

घाव; नासूर; फोड़ा

ulcer; sore; festering wound

ناسور; زخم; پھوڑا

Arabic

उस ने नासूर कर लिया होगा ज़ख़्म को शाएरी बनाते हुए — Ammar Iqbal
हम ने इलाज-ए-ज़ख़्म की हसरत में ऐ हबीब ज़ख़्मों को नोच नोच के नासूर कर लिया — Sohil Barelvi
अब क्यूँँ मेरे ज़ख़्म भला नासूर हुए ? मैं तो सबकी ख़ातिर मरहम होता हूँ — Sandeep kushwaha
ज़ख़्म-ए-इश्क़ था वैसे ही भर जाता इक दिन वक़्त के साथ यार सुख़न के टाँकों ने तो नासूर कर दिया इस को — Yuvraj Singh Faujdar
हमारे दर्मियां कुछ था नहीं जग में नुमाइश थी तेरे जाने पे फिर क्यूँँ दिल मेरा नासूर होता है — Sakshi Saraswat
इश्क़ नासूर बन गया है अब कुछ नहीं फ़ायदा दवा कर के — Meem Maroof Ashraf
अम्न की बातें वो भी नासूर के साथ जंग ज़ाहिर है तो है मग़रूर के साथ — Praveen Bhardwaj
ज़ख़्म नासूर है और दवा भी वही हर्फ़ ढाई मगर ज़िंदगी है मेरी — Nainsee Gupta 'Nayantara'

'नासूर' मूल रूप से एक शारीरिक घाव को संदर्भित करता है जो पकता है। कविता में, यह गहरी भावनात्मक पीड़ा या अनसुलझे मुद्दों के लिए एक रूपक बन जाता है जो आत्मा को प्रभावित करते रहते हैं।

कवि अक्सर 'नासूर' का उपयोग अतीत के आघातों के स्थायी दर्द, दिल के पकते घावों, और कुछ दुखों की स्थायी प्रकृति को व्यक्त करने के लिए करते हैं। यह उपचार और समाधान के विपरीत है।

कविता के क्षेत्र में, 'नासूर' उन घावों की एक मार्मिक याद दिलाता है जिन्हें समय आसानी से नहीं भर सकता। यह स्थायी दर्द के बीच मानव आत्मा की दृढ़ता को व्यक्त करता है।