ज़ख़्म नासूर थे सिल नहीं पाए हमफूल पतझड़ के थे खिल नहीं पाए हमतुम हर इक बात में हम से बेहतर रहेइस लिए भी तो बस मिल नहीं पाए हम— Kavi Vikash Shukla