Kavi Vikash Shukla

Kavi Vikash Shukla

@vikkymaharaj48

Kavi Vikash Shukla shayari collection includes sher, ghazal and nazm available in Hindi and English. Dive in Kavi Vikash Shukla's shayari and don't forget to save your favorite ones.

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  • Sher
ज़ख़्म नासूर थे सिल नहीं पाए हम
फूल पतझड़ के थे खिल नहीं पाए हम

तुम हर इक बात में हमसे बेहतर रहे
इसलिए भी तो बस मिल नहीं पाए हम
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Kavi Vikash Shukla
माँ के हाथों खाना खाना अच्छा लगता है
आज भी पापा का समझाना अच्छा लगता है

जिम्मेदारियाँ घर में रहने नइँ देती वरना
किसको अपने घर से जाना अच्छा लगता है
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Kavi Vikash Shukla
सफ़र का सारा बोझ उठाया है मैंने
रस्तों को आसान बनाया है मैंने

उसकी आँखें दरिया हैं सब डूब गए
खुद को कितनी बार बचाया है मैंने
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Kavi Vikash Shukla
कोई सपने दिखाने नहीं हैं हमें
ज़ख्मे दिल भी मिटाने नहीं हैं हमें

जो अना दाव पर रख निभाने पड़े
ऐसे रिश्ते निभाने नहीं हैं हमें
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Kavi Vikash Shukla
बाकी उम्मीद थी आखिरी काट दी
हम थे जुगनू सो सब तीरगी काट दी

तुम हमारे थे ये एक भ्रम था हमें
बस इसी भ्रम में ये ज़िन्दगी काट दी
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Kavi Vikash Shukla
जो कुछ करने निकले हैं कर जाएँगे
हम जुगनू अंधियारों से डर जाएँगे?

तेरी सूरत भी अब मुझको याद नहीं
क्या सोचा था बिन तेरे मर जाएँगे?
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Kavi Vikash Shukla
है कठिन राह तुम इस पे चलना नहीं
चांद होना मगर सुबह ढलना नहीं

हर गुलाब एक दिन यूँ तो मुरझाएगा
तुम मगर यूँ फजा संग बदलना नहीं
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Kavi Vikash Shukla
हर दिन तेरा रास्ता देखा जाएगा
जो कुछ कहेगी दुनिया देखा जाएगा

इश्क़ है तुमसे बस इतना कह लेने दो
फिर जो कुछ भी होगा देखा जाएगा
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Kavi Vikash Shukla
दर्द-ओ-गम से हटा ली गई ज़िन्दगी
मुश्किलों से निकाली गई ज़िन्दगी

फिर किसी रोज़ तुमसे मोहब्बत हुई
फिर न हमसे संभाली गई ज़िन्दगी
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Kavi Vikash Shukla
हर इक दर्द को हँसकर सहना पड़ता है
या फिर जख्म छुपाकर रहना पड़ता है

वो जब हँसकर पूछता है यूँ हाल मेरा
मुझको सब कुछ अच्छा कहना पड़ता है
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Kavi Vikash Shukla