जो कुछ करने निकले हैं कर जाएँगेहम जुगनू अंधियारों से डर जाएँगे?तेरी सूरत भी अब मुझ को याद नहींक्या सोचा था बिन तेरे मर जाएँगे?— Kavi Vikash Shukla