बाकी उम्मीद थी आख़िरी काट दीहम थे जुगनू सो सब तीरगी काट दीतुम हमारे थे ये एक भ्रम था हमेंबस इसी भ्रम में ये ज़िन्दगी काट दी— Kavi Vikash Shukla