रगों में लफ़्ज़ अब बहने लगा है
अकेला कमरे में रहने लगा है
उसे आता है अब चेहरा जो पढ़ना
सभी बातों को वो सहने लगा है
लगा यूँ जौन को बारिश में पढ़ के
कोई सरकारी पुल ढहने लगा है
हुनर-वर कश्फ़ कोताही करेंगे
नया लड़का ग़ज़ल कहने लगा है
गले लग कर न सुन पाया तू आवाज़
तेरा दिल क्या तेरे दहने लगा है
— 100rav















