मुहब्बत मुझ सेे और चिट्ठी किसी और से
तुझे आती है अब हिचकी किसी और से
मेरे हिस्से में दिन और रात उस के साथ
ली सब्ज़ी मुझ से और रोटी किसी और से
किसी और से मुहब्बत करते हैं जब लोग
तो क्यूँ कर लेते हैं शादी किसी और से
— 100rav
तुझे आती है अब हिचकी किसी और से
मेरे हिस्से में दिन और रात उस के साथ
ली सब्ज़ी मुझ से और रोटी किसी और से
किसी और से मुहब्बत करते हैं जब लोग
तो क्यूँ कर लेते हैं शादी किसी और से
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