100rav
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Ghazal

तुझे जिस का है डर हाँ अब वही होगा

तेरी शादी का दिन भी मुल्तवी होगा

मेरी जो ज़िंदगी में ज़हर घोला है
तेरा रस्ता भी कैसे संदली होगा

नहीं बस फूल ज़िद में बाग तोड़ा है
तेरा और उस का घर भी मातमी होगा

लिखेंगे बे-वफ़ा सब गर बता दूँगा
जहाँ भी नाम लिखना मोशमी होगा

गुमाँ है उस को अपनी बेवफ़ाई पर
कि सौरभ मुझ पे करता शा'इरी होगा

— 100rav

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