तुझे जिस का है डर हाँ अब वही होगा
तेरी शादी का दिन भी मुल्तवी होगा
मेरी जो ज़िंदगी में ज़हर घोला है
तेरा रस्ता भी कैसे संदली होगा
नहीं बस फूल ज़िद में बाग तोड़ा है
तेरा और उस का घर भी मातमी होगा
लिखेंगे बे-वफ़ा सब गर बता दूँगा
जहाँ भी नाम लिखना मोशमी होगा
गुमाँ है उस को अपनी बेवफ़ाई पर
कि सौरभ मुझ पे करता शा'इरी होगा
— 100rav















