देखो जब तब बनके पागल देखता है
हर जगह हरदम ये पल पल देखता है
बाल, चेहरा, गाल, आँखें भी हैं लेकिन,
बेहया तो सिर्फ़ आँचल देखता है
छोटे कपड़े बेचता है सुर
में वाला,
आँखों का अब कौन काजल देखता है
आदमी पर तो हवस ऐसे है हावी,
रोड, घर, दफ़्तर न जंगल देखता है
शर्म से नीचे नज़र कर जाने वाला,
चोर बन जाता है पायल देखता है
है नई खिड़की न इतना देख सौरभ,
कब तलक बोलेगा बादल देखता है
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