meraa dil yaar himmat kyun nahin karta | मेरा दिल यार हिम्मत क्यूँ नहीं करता

  - 100rav

मेरा दिल यार हिम्मत क्यूँ नहीं करता
नज़र से ही इबारत क्यूँ नहीं करता

पलट कर देखती हैं यार वो भी जब
बता कर ज़ीस्त जन्नत क्यूँ नहीं करता

मोहब्बत हम-सफ़र बनकर नहीं है जब
तू जोरू से मोहब्बत क्यूँ नहीं करता

ज़काती ग़म में है मारूफ़ होकर अब
ख़ुदा मैं ख़ैर-बरकत क्यूँ नहीं करता

उसे हक़ है मोहब्बत का किसी से भी
है ग़म में सब कि नफ़रत क्यूँ नहीं करता

मिली जब मौत थी हैरत में ये सौरभ
तू कोई भी शिकायत क्यूँ नहीं करता

  - 100rav

Bhai Shayari

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