kahaanii ko naya ik mod dogi kya | कहानी को नया इक मोड़ दोगी क्या

  - 100rav

कहानी को नया इक मोड़ दोगी क्या
मेरे ख़ातिर उसे तुम छोड़ दोगी क्या

नहीं उम्मीद तुम सेे लौट आओगी
मगर आकर मुझे झिंझोड़ दोगी क्या

मैं साँसें ख़्वाब और दिल टूटने को हैं
हाँ फेवीकोल बनके जोड़ दोगी क्या

घड़ा दिल का नदी है चाहता भरना
उतरकर दिल में इसको फोड़ दोगी क्या

हिमाक़त दिल तुम्हें पाने की करता है
ये सोचे भी न इतना तोड़ दोगी क्या

  - 100rav

Good morning Shayari

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